सोमवार, 8 जून 2015

सुवह का भ्रमण

डा. प्रवीन चोपडा जो एक ब्लागर हैँ ने मुझे कहा है कि मै अपने सुबह के भ्रमण के बारे में कुछ लिखू । यह उन्होंने मुझे प्रेरित किया है कि मै भी लेखन के क्षेत्र में  पहला कदम रखूं ।रिटायरमेंट के तीन साल पहले मेरी नियुक्ति शहर की बैंक शाखा में हो गई। इससे पहले शहर से थोडा दूर पोस्टिंग होती रहती थी जहां से मै  रोज आता जाता था।इसलिए काफी दौड भाग रहती थी।सालाना  स्वाथ्य परीक्षण में मेरी स्कोरिंग अच्छी रहती थी ।इसलिए morning walk  के बारे में कभी सोचा नही।
             हमारे बैकं शाखा में खाने पीने का वढि़या माहैाल था।मिठाई एवं समोसे आते ही रहते थे।कुर्सी पर बैठना करीव आठ घंटे से ज्यादा हो जाता था।एक दिन मै एक मिञ डाक्टर के यहां बैठा था शौकिया  B P नापने बाली मशीन देख कर मैने अपना बीपी चेक करवाया तो मेरा बीपी बहुत ज्यादा निकला।पहले तो मैने मशीन खराब होने की बात कही तो डाक्टर ने दुबारा नाप कर मेरी शंका दूर की।फिर अच्छे डाक्टर से अपने को दिखा कर दूसरे दिन से बाक शुरू किया। करीव दो माह बाद मेरा वीपी नार्मल हो गया।
                   तब से वाकिंग मेरे खून में रच बस गया है।अब तो आलम ऐ है कि बिना बाकिंग के दिन बेकार सा लगता है।सुवह भ्रमण से मानसिक एवं शारीरिक दोनो को बहुत लाभ होता है।

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